समर्थक

सोमवार, 29 नवंबर 2010

ऐ मेरे प्राण बता...

'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती नीरजा द्विवेदी जी की कविता. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा...

ऐ मेरे प्राण बता
क्या भुला पाओगे?

वो झरोखे में छुपी
तेरे नयनों की चुभन,
गोरे रंग में जो घुली-
वो गुलाबों की घुलन,
तेरा तन छूकर आती
संदली मलय पवन.

ऐ मेरे प्राण बता
क्या भुला पाओगे?

तेरी चूडी में बसी
मेरे दिल की धडकन.
मेरे आंगन में बजी
वो पायल की रुनझुन.
मेरी नींदें थपकाती
तेरे अधरों की धुन.

ऐ मेरे प्राण बता
क्या भुला पाओगे?

तेरे घूंघट में छिपी
जो रतनारी चितवन,
वो कपोलों पे बसी
मृदु स्मिति की थिरकन,
मेरा अन्तर अकुलाती-
वो प्रिया-प्रिया की रटन.

ऐ मेरे प्राण बता
क्या भुला पाओगे?

मेरे मन में जो लगी,
इक अनोखी सी अगन.
मेरे मानस में बसी,
तेरे अधरों की छुअन.
मेरा तन सिहराती
तेरे श्वासों की तपन.

ऐ मेरे प्राण बता
क्या भुला पाओगे?

मेरे स्वप्नों में बसा
तेरा मरमरी सा बदन.
स्याह अलकें छितराती
छेडती मदमस्त पवन.
मेरा अन्तर तडपाती
तुझे पाने की लगन.

ऐ मेरे प्राण बता
क्या भुला पाओगे?
************************************************************************************
नामः नीरजा द्विवेदी/ शिक्षाः एम.ए.(इतिहास).वृत्तिः साहित्यकार एवं गीतकार. समाजोत्थान हेतु चिंतन एवं पारिवारिक समस्याओं के निवारण हेतु सक्रिय पहल कर अनेक परिवारों की समस्याओं का सफल निदान. सामाजिक एवं मानवीय सम्बंधों पर लेखन. ‘ज्ञान प्रसार संस्थान’ की अध्यक्ष एवं उसके तत्वावधान में निर्बल वर्ग के बच्चों हेतु निःशुल्क विद्यालय एवं पुस्तकालय का संचालन एवं शिक्षण कार्य.प्रकाशन/ प्रसारण - कादम्बिनी, सरिता, मनोरमा, गृहशोभा, पुलिस पत्रिका, सुरभि समग्र आदि अनेकों पत्रिकाओं एवं समाचार पत्रों में लेख, कहानियां, संस्मरण आदि प्रकाशित. भारत, ब्रिटेन एवं अमेरिका में कवि गोष्ठियों में काव्य पाठ, बी. बी. सी. एवं आकाशवाणी पर कविता/कहानी का पाठ। ‘कैसेट जारी- गुनगुना उठे अधर’ नाम से गीतों का टी. सीरीज़ का कैसेट.कृतियाँ- उपन्यास, कहानी, कविता, संस्मरण एवं शोध विधाओं पर आठ पुस्तकें प्रकाशित- दादी माँ का चेहरा, पटाक्षेप, मानस की धुंध(कहानी संग्रह,कालचक्र से परे (उपन्यास, गाती जीवन वीणा, गुनगुना उठे अधर (कविता संग्रह), निष्ठा के शिखर बिंदु (संस्मरण), अशरीरी संसार (साक्षात्कार आधारित शोध पुस्तक). प्रकाश्य पुस्तकः अमेरिका प्रवास के संस्मरण.सम्मानः विदुषी रत्न-अखिल भारतीय ब्रज साहित्य संगम, मथुरा, गीत विभा- साहित्यानंद परिषद, खीरी, आथर्स गिल्ड आफ़ इंडिया- 2001, गढ़-गंगा शिखर सम्मान- अखिल भारतीय भाषा साहित्य सम्मेलन, भारत भारती- महाकोशल साहित्य एवं संस्कृति परिषद, जबलपुर, कलाश्री सम्मान, लखनऊ, महीयसी महादेवी वर्मा सम्मान- साहित्य प्रोत्साहन संस्थान लखनऊ, यू. पी. रत्न- आल इंडिया कान्फ़रेंस आफ़ इंटेलेक्चुअल्स, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान- सर्जना पुरस्कार.अन्य- अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश पुलिस परिवार कल्याण समिति के रूप में उत्तर प्रदेश के पुलिसजन के कल्याणार्थ अतिश्लाघनीय कार्य. भारतीय लेखिका परिषद, लखनऊ एवं लेखिका संघ, दिल्ली की सक्रिय सदस्य.संपर्क- 1/137, विवेकखंड, गोमतीनगर, लखनऊ. दूरभाषः 2304276 , neerjadewedy@yahoo.com

सोमवार, 22 नवंबर 2010

सिकता के कणों पर

'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती पूर्व पुलिस महानिदेशक महेश चंद्र द्विवेदी जी की कविता. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा...

सिकता के कणों पर खींचती हूं चित्र मैं
स्वयं ही, फिर स्वयं ही उन्हें मिटाती हूं;
रात्रि भर जागकर देखती हूं दिवास्वप्न,
उजास में स्वयं सयत्न सब भूल जाती हूं.

दस कदम चलती हूं उनके साथ साथ,
फिर अजनबी बनकर आगे बढ़ जाती हूं;
अनजाने आकाश में स्वयं बढ़ाती पेंग,
ऊंचाई पर पहुंचकर भयभीत हो जाती हूं.

परागरस से भरी हुई हूं अन्तस्तल तक,
भ्रमर की मांग को फिर भी ठुकराती हूं;
कुमुदिनी सी मूंदना चाहती हूं स्वयं में
उसे, भौंरे के निकट आने पर घबराती हूं.

अनवरत द्वन्द्व ही है इस जीवन का सच,
पर स्वयं को निर्द्वन्द्वता का पाठ पढ़ाती हूं,
ह्रदय जब भर रहा होता है लम्बी कुलांचें,
मैं सौम्यता की जीवन्त मूर्ति बन जाती हूं.


***********************************************************************************
नाम: महेश चंद्र द्विवेदी/जन्म-स्थान एवं जन्मतिथिः मानीकोठी, इटावा / 7 जुलाई, 1941/ शिक्षाः एम. एस. सी./भैतिकी/-लखनऊ विश्वविद्यालय /गोल्ड मेडलिस्ट/-एम. एस. सी./सोशल प्लानिंग/-लंदन स्कूल आफ़ इकोनोमिक्स- डिप्लोमा इन पब्लिक एडमिनिसट्रेशन- विशारद/. देश-विदेश की विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में हिंदी और अंग्रेजी में विभिन्न विधाओं में रचनाओं का प्रकाशन और आकाशवाणी-दूरदर्शन इत्यादि पर प्रसारण. भारत सहित विदेशों में भी मंचों पर पाठ. रामायण ज्ञान केन्द्र, यू. के. /बर्मिंघम-2007 और विश्व हिंदी सम्मेलन, /न्यूयार्क-२००७ में भागीदारी. विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा सम्मानित- अलंकृत.कुल 7 पुस्तकें प्रकाशित और तीन प्रकाशनाधीन . प्रकाशित पुस्तकें- 1.उर्मि- उपन्यास 2.सर्जना के स्वर- कविता संग्रह 3.एक बौना मानव- कहानी संग्रह 4. सत्यबोध- कहानी संग्रह 5.क्लियर फ़ंडा- व्यंग्य संग्रह 6.भज्जी का जूता- व्यंग्य संग्रह 7. प्रिय अप्रिय प्रशासकीय प्रसंग- संस्मरण 8. अनजाने आकाश में- कविता संग्रह . प्रकाशनाधीन- 1.भीगे पंख- उपन्यास २. मानिला की योगिनी- उपन्यास 3.कहानी संग्रह. आई. पी. एस.- पुलिस महानिदेशक के पद से सेवानिवृत. सम्प्रति साहित्य और समाज सेवा में रत. डा. जितेंन्द्र कुमार सिंह ‘संजय’ द्वारा श्री महेश चंद्र द्विवेदी एवं उनकी पत्नी के साहित्य पर ‘साहित्यकार द्विवेदी दम्पति’ शीर्षक से पुस्तक प्रकाशित, एम. फ़िल, लखनऊ विश्वविद्यालय की छात्रा कु.श्रुति शुक्ल द्वारा श्री महेश चंद्र द्विवेदी के साहित्य पर शोध. संपर्क :‘ज्ञान प्रसार संस्थान’, 1/137, विवेकखंड, गोमतीनगर, लखनऊ -226010 / फोनः 2304276 / 9415063030ई मेलः maheshdewedy@yahoo.com

सोमवार, 15 नवंबर 2010

प्रेयसी

'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती कृष्ण कुमार यादव जी की कविता 'प्रेयसी'. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा...

छोड़ देता हूँ निढाल
अपने को उसकी बाँहों में
बालों में अंगुलियाँ फिराते-फिराते
हर लिया है हर कष्ट को उसने।

एक शिशु की तरह
सिमटा जा रहा हूँ
उसकी जकड़न में
कुछ देर बाद
खत्म हो जाता है
द्वैत का भाव।

गहरी साँसों के बीच
उठती-गिरती धड़कनें
खामोश हो जाती हैं
और मिलने लगती हैं आत्मायें
मानो जन्म-जन्म की प्यासी हों।

ऐसे ही किसी पल में
साकार होता है
एक नव जीवन का स्वप्न।


( कृष्ण कुमार यादव जी के जीवन-परिचय के लिए क्लिक करें)

बुधवार, 10 नवंबर 2010

किसी ने कभी लिखा ही नहीं...

'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती वंदना गुप्ता जी की कविता. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा...

मुझे इंतज़ार है
उस एक ख़त का
जिसमें मजमून हो
उन महकते हुए
जज्बातों का
उन सिमटे हुए
अल्फाजों का
उन बिखरे हुए
अहसासों का
जो किसी ने
याद में मेरी
संजोये हों
कुछ न कहना
चाहा हो कभी
मगर फिर भी
हर लफ्ज़ जैसे
दिल के राज़
खोल रहा हो
धडकनों की भी
एक -एक धड़कन
खतों में सुनाई देती हो
आंखों की लाली कर रंग
ख़त के हर लफ्ज़ में
नज़र आता हो
इंतज़ार का हर पल
ज्यूँ ख़त में उतर आया हो
हर शब्द किसी की तड़प का
किस के कुंवारे प्रेम का
किसी के लरजते जज्बातों का
जैसे निनाद करता हो
जिसमें किसी की
प्रतीक्षारत शाम की
उदासी सिमटी हो
आंखों में गुजरी रात का
आलम हो
दिन में चुभते इंतज़ार के
पलों का दीदार हो
किसी के गेसुओं से
टपकती पानी की बूँदें
जलतरंग सुनाती हों
किसी के तबस्सुम में
डूबी ग़ज़ल हो
किसी के बहकते
ज़ज्बातों का रूदन हो
किसी के ख्यालों में
डूबी मदहोशी हो
किसी की सुबह की
मादकता हो
किसी की यादों में
गुजरी शाम की सुगंध हो
हर वो ख्यालात हो
जहाँ सिर्फ़
महबूब का ही ख्वाब हो
प्यार की वो प्यास हो
जहाँ जिस्मों से परे
रूहों के मिलन का
जिक्र हो
हर लफ्ज़ जहाँ
महबूब का ही
अक्स बन गया हो
मुझे इंतज़ार है
उस एक ख़त का
जो किसी ने कभी
लिखा ही नही
किसी ने कभी !!
*****************************************************************************
( सप्तरंगी प्रेम पर वंदना गुप्ता की अन्य रचनाओं के लिए क्लिक करें)

सोमवार, 1 नवंबर 2010

प्रेम-पत्र

'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटता जितेन्द्र ‘जौहर’ का 'प्रेम-पत्र' . आपकी प्रतिक्रियाओं और प्रोत्साहन का यथावत इंतजार रहेगा...

आपका प्रेम-पत्र...
जैसे किसी वैभवशाली ‘अभाव-महल’ में
आकुल-व्याकुल
उर्मिला के समक्ष
किसी लक्ष्मण का
भावमय गृहागमन !

आपका प्रेम-पत्र...
जैसे किसी विस्मरण-गुहा में
उपेक्षित-तिरस्कृत
दमयन्ती के गिर्द
किसी निष्ठुर ‘नल’ की
सहृदय वापसी !

आपका प्रेम-पत्र...
जैसे किसी उत्तप्त मरुस्थल में
तृषावंत-क्लांत
मृग के सम्मुख
सहसा किसी नखलिस्तान का
आह्लादक प्राकट्य !


आपका प्रेम-पत्र...
जैसे किसी निर्जन-निर्तृण वनप्रांतर में
शाप-तापग्रस्त
प्रस्तर-शिला के शीश पर
किसी विरल बादल की
जीवन-जलवर्षा !
***********************************************************************************
नाम : जितेन्द्र ‘जौहर’/जन्म : 26 अगस्त, 1973 (काग़ज़ पर)20 जुलाई, 1971 (माँ ने बताया) / जन्म-स्थान : छिबरामऊ, (कन्नौज) उ.प्र./शिक्षा :एम. ए. (अंग्रेज़ी: भाषा एवं साहित्य), बी. एड., सी.सी.ए.
पी.जी. स्तर पर बैच टॉपर / अ.भा.वै.महासभा द्वारा ‘रजत-प्रतिमा’ से सम्मानित।
लेखन-विधाएँ : गीत, ग़ज़ल, दोहा, मुक्तछंद, हाइकू, मुक्तक, हास्य-व्यंग्य, लघुकथा,समीक्षा, भूमिका, आलेख, आदि। हिन्दी एवं अंग्रेज़ी में समानान्तर लेखन।
प्रकाशन : दै.‘हिन्दुस्तान’, ‘दैनिक जागरण’, ‘गाण्डीव’, साप्ता./पाक्षिक‘पाञ्चजन्य’,सीधीबात,प्रेसमैन, बहुजनविकास मासिक ‘पाखी’ गोलकोण्डा दर्पण, कल्याण(गीता प्रेस), अक्षरपर्व, अट्टहास, त्रैमा.‘समांतर’, कथाबिम्ब,वसुधा(कनाडा), सार्थक, अक्षरम्‌ संगोष्ठी, व्यंग्य-यात्रा, सरस्वती सुमन, अक्षत्‌,युगीन-काव्या, मरु-गुलशन, चक्रवाक्‌, सरोपमा, गुफ़्तगू, व्यंग्य-तरंग,मेकलसुता, तेवरी-पक्ष, वार्षिक ‘हास्यम्‌-व्यंग्य‍म्‌’, हस्तक्षेप, आदि सहित
देश-विदेश की लगभग 200 पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। अनेकानेक महत्त्वपूर्ण समवेत संग्रहों में रचनाएँ संकलित।
सक्रिय योगदान : सम्पादकीय सलाहकार ‘प्रेरणा’(शाहजहाँपुर,उ.प्र.)/विशेष सहायोगी ‘प्रयास’(अलीगढ़,उ.प्र.) एवं ‘विविधा’(उत्तराखण्ड)।
प्रसारण : ई.टी.वी. के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘गुदगुदी’ में अनेक एपीसोड प्रसारित।आकाशवाणी से एकल काव्य-पाठ, साक्षात्कार एवं गोष्ठी आदि के दर्जनाधिक प्रसारण।
वेब मैग्ज़ीन्स एवं न्यूज़ पोर्टल्स पर रचनात्मक उपस्थिति।वीडियो एलबम में फ़िल्मांकित गीत शामिल।सिटी चैनल्स पर सरस कव्य-पाठ।
काव्य-मंच : संयोजन एवं प्रभावपूर्ण संचालन के लिए विशेष पहचान।ओजस्वी व मर्यादित हास्य-व्यंग्यपूर्ण काव्य-पाठ का प्रभावी निर्वाह।
भूमिका-लेखन : देश के अनेक सुप्रसिद्ध लेखकों की कृतियों में सारगर्भित भूमिका-लेखन।
अनुवाद : अंग्रेज़ी कथा-संग्रह ‘ऑफ़रिंग्स’ का हिन्दी अनुवाद।
संपादन : ‘अशोक अंजुम: व्यक्ति एवं अभिव्यक्ति’ (समग्र मूल्यांकनपरक कृति)।‘अरण्य का सौन्दर्य’ (डॉ. इन्दिरा अग्रवाल के सृजन पर आधारित समीक्षा-कृति)।‘त्योहारों के रंग, कविता के संग’ (तैयारी में...)।
विशेष : अनेक काव्य-रचनाएँ संगीतबद्ध एवं गायकों द्वारा गायन।राष्ट्रीय/ प्रान्तीय/ क्षेत्रीय स्तर पर विविध साहित्यिक/सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के निर्णायक-मण्डल में शामिल। उ. म. क्षे. सांस्कृतिक केन्द्र, (सांस्कृतिक मंत्रालय, भारत सरकार)एवं‘स्टार इण्डिया फ़ाउण्डेशन’ द्वारा आयोजित कार्यशालाओं में ‘फोनेटिक्स’,‘सेल्फ़
डेवलपमेण्ट’,‘कम्यूनिकेशन एण्ड प्रेज़ेण्टेशन स्किल’, आदि विषयों पर कार्यशालाओं में रिसोर्स पर्सन/मुख्य वक्ता के रूप में प्रभावपूर्ण भागीदारी।
सम्मान/पुरस्कार:अनेक सम्मान एवं पुरस्कार (समारोहपूर्वक प्राप्त)। जैसे- पं. संतोष तिवारी स्मृति सम्मान, साहित्यश्री(के.औ.सु.ब. इकाई मप्र), नागार्जुन सम्मान, साहित्य भारती, महादेवी वर्मा सम्मान, आदि के अतिरिक्त विभिन्न प्रशस्तियाँ व स्मृति-चिह्न प्राप्त। प्रकाशित रचनाओपर 500-600 से अधिक प्रशंसा व आशीष-पत्र प्राप्त। अंतर्जाल पर जौहरवाणी के माध्यम से सक्रियता.
सम्प्रति : अंग्रेज़ी-अध्यापन (ए.बी.आई. कॉलेज, रेणुसागर, सोनभद्र, उप्र 231218), भारत.
सम्पर्क : आई आर- 13/6, रेणुसागर, सोनभद्र, (उ.प्र.) 231218 भारत.
मोबाइल नं. +91 9450320472.
ईमेल jjauharpoet@gmail.com