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गुरुवार, 20 मई 2010

प्यार का सार

'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती रश्मि प्रभा जी की एक कविता. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा...

दस्तकें यादों की
सोने नहीं देतीं
दरवाज़े का पल्ला
शोर करता है
खट खट खट खट...
सांकल ही नहीं
तो हवाएँ नम सी
यादों की सिहरन बन
अन्दर आ जाती हैं
पत्तों की खड़- खड़
मायूस कर जाती हैं !
कुछ पन्ने मुड़े-तुड़े लेकर
अरमानों की आँखें खुली हैं
एक ख़त लिख दूँ.....
संभव है दस्तकों की रूह को
चैन आ जाए
हवाएँ एक लोरी थमा जाए
भीगे पन्ने
प्यार का सार बन जायें !
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नाम- रश्मि प्रभा
स्नातक - हिंदी प्रतिष्ठा
रूचि- शब्दों के साथ जीना
प्रकाशन- 'कादम्बिनी', 'अर्गला', वोमेन ऑन टॉप', 'पुरवाई '(यूके से प्रकाशित पत्रिका), 'जनसत्ता' आदि में रचनाएँ प्रकाशित, हिन्दयुग्म में ऑनलाइन कवि-सम्मलेन सञ्चालन.
प्रकाशित कृतियाँ- शब्दों का रिश्ता (काव्य-संग्रह), अनमोल संचयन (काव्य-संग्रह का संपादन)
मेरे बारे में- सौभाग्य मेरा की मैं कवि पन्त की मानस पुत्री श्रीमती सरस्वती प्रसाद की बेटी हूँ और मेरा नामकरण स्वर्गीय सुमित्रा नंदन पन्त ने किया और मेरे नाम के साथ अपनी स्व रचित पंक्तियाँ मेरे नाम की..."सुन्दर जीवन का क्रम रे, सुन्दर-सुन्दर जग-जीवन" , शब्दों की पांडुलिपि मुझे विरासत मे मिली है. अगर शब्दों की धनी मैं ना होती तो मेरा मन, मेरे विचार मेरे अन्दर दम तोड़ देते...मेरा मन जहाँ तक जाता है, मेरे शब्द उसके अभिव्यक्ति बन जाते हैं, यकीनन, ये शब्द ही मेरा सुकून हैं. अंतर्जाल पर मेरी भावनाएं के माध्यम से सक्रियता.
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