'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती मुकेश कुमार सिन्हा जी की कविता 'प्यार, प्यार और प्यार'. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा...
न आसमान को मुट्ठी में,
कैद करने की थी ख्वाइश,
और न, चाँद-तारे तोड़ने की चाहत!
कोशिश थी तो बस,
इतना तो पता चले की,
क्या है?
अपने अहसास की ताकत!!
इतना था अरमान!
की गुमनामी की अँधेरे मैं,
प्यार के सागर मैं,
धुधु अपनी पहचान!!
इसी सोच के साथ,
मैंने निहारा आसमान!!!
और खोला मन को द्वार!
ताकि कुछ लिख पाऊं,
आखिर क्या है?
ढाई आखर प्यार!!
पर बिखर जाते हैं,
कभी शब्द तो कभी,
मन को पतवार!!!
रह जाती है,
कलम की मुट्ठी खाली हरबार!!!!
फिर आया याद,
खुला मन को द्वार!
कि किया नहीं जाता प्यार!!
सिर्फ जिया जाता है प्यार!!!
किसी के नाम के साथ,
किसी कि नाम के खातिर!
प्यार, प्यार और प्यार !!
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मुकेश कुमार सिन्हा झारखंड के धार्मिक राजधानी यानि देवघर (बैद्यनाथधाम) का रहने वाला हूँ! वैसे तो देवघर का नाम बहुतो ने सुना भी न होगा,पर यह शहर मेरे दिल मैं एक अजब से कसक पैदा करता है, ग्यारह ज्योतिर्लिंग और १०८ शक्ति पीठ में से एक है, पर मेरे लिए मेरा शहर मुझे अपने जवानी की याद दिलाता है, मुझे अपने कॉलेज की याद दिलाता है और कभी कभी मंदिर परिसर तथा शिव गंगा का तट याद दिलाता है,तो कभी दोस्तों के संग की गयी मस्तियाँ याद दिलाता है..काश वो शुकून इस मेट्रो यानि आदमियों के जंगल यानि दिल्ली मैं भी मिल पाता. पर सब कुछ सोचने से नहीं मिलता और जो मिला है उससे मैं खुश हूँ.क्योंकि इस बड़े से शहर मैं मेरी दुनिया अब सिमट कर मेरी पत्नी और अपने दोनों शैतानों (यशु-रिशु)के इर्द-गिर्द रह गयी है और अपने इस दुनिया में ही अब मस्त हूँ, खुश हूँ.अंतर्जाल पर जिंदगी की राहें के माध्यम से सक्रियता.
न आसमान को मुट्ठी में,
कैद करने की थी ख्वाइश,
और न, चाँद-तारे तोड़ने की चाहत!
कोशिश थी तो बस,
इतना तो पता चले की,
क्या है?
अपने अहसास की ताकत!!
इतना था अरमान!
की गुमनामी की अँधेरे मैं,
प्यार के सागर मैं,
धुधु अपनी पहचान!!
इसी सोच के साथ,
मैंने निहारा आसमान!!!
और खोला मन को द्वार!
ताकि कुछ लिख पाऊं,
आखिर क्या है?
ढाई आखर प्यार!!
पर बिखर जाते हैं,
कभी शब्द तो कभी,
मन को पतवार!!!
रह जाती है,
कलम की मुट्ठी खाली हरबार!!!!
फिर आया याद,
खुला मन को द्वार!
कि किया नहीं जाता प्यार!!
सिर्फ जिया जाता है प्यार!!!
किसी के नाम के साथ,
किसी कि नाम के खातिर!
प्यार, प्यार और प्यार !!
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25 टिप्पणियां:
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति!
--
मुकेशकुमार सिन्हा जी को बधाई!
sundar abhivyakti,
sinhaji ko badhai
http://sanjaykuamr.blogspot.com/
मुकेश कुमार सिन्हा जी की बेहतरीन कविता और उनके शहर, झारखंड के धार्मिक राजधानी यानि देवघर (बैद्यनाथधाम) के बारे में जानकार अच्छा लगा.
Dhanyawad "Saptrangi Prem" ka jo unhone hamaree ek kavita ko jagah diya............tahe-dil se shukriya.......:)
आखिर क्या है?
ढाई आखर प्यार!!
पर बिखर जाते हैं,
कभी शब्द तो कभी,
मन को पतवार!!!
रह जाती है,
कलम की मुट्ठी खाली हरबार!!!!
फिर आया याद,
खुला मन को द्वार!
कि किया नहीं जाता प्यार!!
सिर्फ जिया जाता है प्यार!!
jee Mukesjh jee..pyaar kiya nahi jata sirf jiya jata hai..behadd umda abhivyakti.
dil se badhai sweekar karen.
mukeshji
bahut hi achche kavita likhe hai sach hai kaha hai kiya nahi jata pyar jiya jata hai pyar kese ke naam ke sath. ye sahi hai ek dum.
प्यार की भावना में भींगे हैं शब्द तुम्हारे...बहुत खूब अभिव्यक्ति है कि..प्यार को महसूस किया जा सकता है पर शब्दों मैं उतारा नहीं जा सकता ...यह एक अहसास है, आभास है . ..चाहत है ...
अरे, देवघर तो हम हर भारत यात्रा में जाते हैं हमारे गुरु जी ठाकुर श्री श्री अनुकूल जी महाराज का राधा स्वामी सत्संग वहीं है.
waah waah waah,,,,
Kya baat hai... Bahut khub Dost Mama...!
कि किया नहीं जाता प्यार!!
सिर्फ जिया जाता है प्यार!!!
किसी के नाम के साथ,
किसी कि नाम के खातिर!
प्यार, प्यार और प्यार !!
प्यार एक अहसाह है प्यार नाम है जिम्मेदारियों का,किसी के सुख और खुशी के लिए जीने का.प्यार का अर्थ है किसी को समझना,किसी की मुस्कराहटो पर निसार होना.वो कोई भि हो सकता है पत्नी,बच्चे,दोस्त,देश मोहल्ला,खुद हम या हमारे मम्मी पापा.
प्यार असीम और अपरिमित है और ईश्वर का दूसरा नाम प्यार है.पूजा,आराधना,श्रद्धा,कर्म-कांड सब व्यर्थ हैं यदि प्यार ना हो.
यही सब तो तुम भि कहना चाहते हो ना?
पर मात्राओं की गलतियाँ खूब कर रखी है. एक बार वापस पढ़ कर एडिट करके पुनः पोस्ट करो इसी कविता को.
कि किया नहीं जाता प्यार!!
सिर्फ जिया जाता है प्यार!!!
किसी के नाम के साथ,
किसी कि नाम के खातिर!
प्यार, प्यार और प्यार !!
प्यार तो यही होता है यदि सच्चा हो तो ...
सुन्दर ..!
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति....
मुकेश जी कुछ व्यस्त रही हूँ इसीलिए आपके ब्लॉग पर नहीं आ पा रही thi.
प्रेम ,प्यार, अनुराग ये सब एक मीठी अनुभूति है , जो सबके जीवन में एक बार जरुर ही आता है.
एक पंक्ति मेरी ओर से जो मेरी ही एक कविता की टुकड़ी है.
मेरे अंदर भी अनुराग छाया है,
मैंने भी जीवन में अनुराग को पाया है.
हर किसी के जीवन में ये आग जलता है ,
पर खुशनसीबों को ही अनुराग मिलता है.
bahut hi sundar shabdon mei piroyi hai rachna ..bahut abdhai mukesh ji.
इतना प्यार कहाँ रखोगे मेरे भाई?
…………..
स्टोनहेंज के रहस्यमय पत्थर।
क्या यह एक मुश्किल पहेली है?
अंतर्मन की सुन्दर अभिव्यक्ति.''मैंने निहारा आसमान!!!और खोला मन का द्वार!''
प्रेम एक सुखद सार्थक सौगात है ऊपर वाले की.. प्रेम में समपर्ण..प्यार की पवित्रता का ही द्योतक है ..तभी तो प्यार किया नहीं जाता जिया जाता है .संसार की सभी विभूतियाँ विलुप्त होकर पुनः प्राप्त की जा सकती है ..लेकिन प्यार..ये प्रेम रस अगर एक बार सुख जाये तो जीवन में उसका पुनः प्रवाह असंभव है ..ये एक ऐसा भाव जो गूंगे के फल की तरह है.. चाहो तो भी शब्दों की सीमा में बंधना..संभव नहीं..बस जिया जाता है...
एक सुन्दर विषय..और उसपे से दिल से निकली सीधे आवाज़...बधाई के पात्र फिर से बनाने के लिए काफी है
mukesh ji,
in panktiyon mein hin jiwan ka sabhi sach samet diya aapne...
कि किया नहीं जाता प्यार!!
सिर्फ जिया जाता है प्यार!!!
किसी के नाम के साथ,
किसी कि नाम के खातिर!
sundar prastuti, badhai aapko.
बहुत खुबसूरत भाव...सुन्दर कविता..बधाई.
प्रेम की सुगंधि लिए बहुत ही कोमल ,मोहक रचना...
कुछेक टंकन त्रुटि रह गयी है रचना में,कृपया इसे सुधार लें...
सिर्फ प्यार.प्यार और प्यार....इसके आगे क्या कहें. शानदार रचना..मुकेश जी को बधाई.
Dhanyawad Dr. Shashtri, Sanjay jee, Shahnawaj jee, Neelam, .........mujhe protsahit karne ke liye bahut bahut dhanyawad!!
Geeta! Putul! bas koshish kari hai shabdo me samtne kee..........:)lekin safal nahi ho sakta kyonki pyar shado me bandhne se upar ki baat haai..:)
Sameer sir!! sahi farmaya aapne ham aapke Anukul Thakur ke shahar ke rahne wale hain........:)
Preeti,............:)
Indu Di! aapki pyari baato ka sadaiv muujhe intzaar rahta hai......aap sach me dil ko chhune wali baaten batate ho..........thanx!
Vani jee, Sangeeta Di........dhanyawad........tahe dil se!
Rajni jee, der hi sahi.........chalega, waise aapki likhi panktiyan jaandaar hain..:)
Shikha, Jakir bhai, mithilesh jee, jenny jee, Akanksha jee, Ranjana jee, Yadav jee..........aap sabko dil se shukriya hausla afjai ke liye.......:)
Anjana di! Aapke shabd mujhe har samay utprerit karte hain, kuchh karne ke liye...........thanx!
Last me ek baat aur
meri ye kavita Rashmi Prabha Di dwara sankalit "Anmol Sanchayan" me prakashit ho chuki hai......:)
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