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सोमवार, 11 अक्तूबर 2010

करीब आने तो दो..

'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती अनामिका (सुनीता) जी की कविता. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा...

अपनी बाहों के घेरे में, थोडा करीब आने तो दो.
सीने से लगा लो मुझे, थोडा करार पाने तो दो.

छुपा लो दामन में, छांव आंचल की तो दो .
सुलगते मेरे एह्सासो को, हमदर्दी की ठंडक तो दो.

दिवार-ए-दिल से चिपके दर्द को आंसुओं में ढलने तो दो .
शब्दों को जुबा बनने के लिए, जमी परतों को जरा पिघलने तो दो.

पलकों के साये में ले लो मुझे, स्पर्श में विलीन होने तो दो.
मासूम सी बन जाऊ मैं, अपनी गोद में गम भुलाने तो दो.

जिंदगी की तेज धूप से क्लांत हारा पथिक हू मैं ,
प्रेम सुधा बरसा के जरा, कराह्ती वेदनाओ को क्षीण होने तो दो !!
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(सप्तरंगी प्रेम पर अनामिका (सुनीता) जी की अन्य रचनाओं के लिए क्लिक करें)
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