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सोमवार, 25 अक्तूबर 2010

तुम्हें बदलना होगा !

'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज रिश्तों में दुनिया की निगाहों के प्रति सचेत करती सुमन 'मीत' जी की एक कविता 'तुम्हें बदलना होगा'. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा...

जीवन की राहें

बहुत हैं पथरीली

तुम्हें गिर कर

फिर संभलना होगा ।


भ्रम की बाहें

बहुत हैं हठीली

छोड़ बन्धनों को

कुछ कर गुजरना होगा ।


दुनिया की निगाहें

बहुत हैं नोकीली

तुम्हें बचकर

आगे बढ़ना होगा ।


रिश्तों की हवाएँ

बहुत हैं जकड़ीली

छोड़ तृष्णा को

मुक्त हो जाना होगा ।


ऐ ‘मन’

तुम्हें बदलना होगा

बदलना होगा

बदलना होगा !!
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