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बुधवार, 22 दिसंबर 2010

तेरे बगैर : सुमन 'मीत'

मेरे मेहरबां

मुड़ के देख ज़रा

कैसी बेज़ारी से गुजरता है

मेरा हर लम्हा

तेरे बगैर.....



तुम थे – 2

तो रोशन था

मेरे ज़र्रे-ज़र्रे में

सकूं का दिया

अब तू नहीं तो – 2

जलता है मेरा

हर कतरा

गम के दिये में

तेरे बगैर......



तुम थे – 2

तो महकती थी

तेरी खुशबू से

मेरी फुलवारी

अब तू नहीं तो – 2

सिमट गई है मेरी

हर डाली

यादों की परछाई में

तेरे बगैर.......



तुम थे तो मैं था – 2

मेरे होने का था

कुछ सबब

सींच कर अपने प्यार से

बनाया था ये महल

अब तू नहीं तो – 2

टूट कर बिखर गया हूँ

इक मकां सा बन गया हूँ

तेरे बगैर

तेरे बगैर.....
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सुमन 'मीत'
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