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सोमवार, 4 मार्च 2013

लौट आओ...

'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर 'धरोहर' के अंतर्गत आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटता सोम ठाकुर जी का एक गीत. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा...

लौट आओ,
माँग के सिंदूर की सौगंध
तुमको नयन का सावन
निमंत्रण दे रहा है,

लौट आओ,
आज पहिले प्यार की सौगन्ध
तुमको प्रीत का बचपन
निमंत्रण दे रहा है,

लौट आओ,
मानिनी, है मान की सौगन्ध
तुमको बात का निर्धन निमंत्रण दे रहा है,

लौट आओ,
हारती मनुहार की सौगंध तुमको
भीगता आँगन निमंत्रण दे रहा है !

- सोम ठाकुर


 

4 टिप्‍पणियां:

MANU PRAKASH TYAGI ने कहा…


बहुत ही सुंदर शब्दो से भरी रचना

dr.mahendrag ने कहा…

मन के भावों को उकेरती सी.सुन्दर भावपूर्ण रचना.

तुषार राज रस्तोगी ने कहा…

बहुत उम्दा |

कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
Tamasha-E-Zindagi
Tamashaezindagi FB Page

expression ने कहा…

बहुत सुन्दर....
इस प्यारी मनुहार को कौन टाल सकता है...उसे लौट आना ही होगा...

अनु