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मंगलवार, 22 जून 2010

मोहब्बत

'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती विजय कुमार सपत्तिजी की एक कविता 'मोहब्बत' . आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा...


कल तुझे डूबते हुए सुर्ख सूरज के साये में
फिर एक बार देखा ...
रात, बड़ी देर तक तेरा साया मेरे साथ ही था ..

एक ख्वाब तेरा चेहरा लिए ;खुदा के घर से
दबे पाँव मेरी नींद की आगोश में सिमट आया ...
और रात की गहराती परछाईयो ने ;
तुझे और मुझे ;
अपने इश्क़ की बाहों में समेट लिया ...

सुबह देखा तो तेरी हथेली में मेरा नाम खुदा हुआ था ..
मेरे जिस्म में तेरे अहसास भरे हुए थे ...

बादलो से भरे आसमान से खुदा ने झाँका और
हमें कुछ मोती दिए मोहब्बत की सौगात में ....

कुछ तुमने अपने भीतर समा लिया
कुछ मेरे पलकों के किनारों पर ;
आंसू बन कर टिक गए ...

खुदा ने जो नूर की बूँद दी है
मोहब्बत के नाम पर ...
उसे अब ताउम्र एक ही ओक में पीना है ;
जिसमे एक हथेली तेरी हो
और एक हथेली मेरी हो .....

आओ इस अहसास को जी ले ,
जिसे मोहब्बत कहते है ...!!
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नाम : विजय कुमार सपत्ति, Working as Sr.G.M.-Marketing in a Hyderabad based company and my interests includes music, books, poetry,photography, movies etc. मुझे मेरी तलाश है .मैं वक़्त के जंगलो में भटकता एक साया हूँ, जिसे एक ऐसे बरगद की तलाश है जहाँ वो कुछ सांस ले सके..ज़िन्दगी की.अंतर्जाल पर THE SOUL OF MY POEMS कविताओं के मन से के माध्यम से सक्रियता.
Mob.- 09849746500
email- vksappatti@gmail.com
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