तेरी मेरी मोहब्बत
खाक हो जाती
गर तू वादा ना करती
इसी जन्म में मिलने का
एक अरसा हुआ
तेरे वादे पर ऐतबार
करते - करते
पल- छिन्न युगों से
लम्बे हो गए हैं
मगर तेरे वादे की
इन्तिहाँ ना हुई
आज जान जाने को है
आस की हर लौ
बुझने को है
तुझे पुकारता है प्यार मेरा
याद दिलाता है वादा तेरा
क्या भूल गयी हो जानाँ
मोहब्बत की तपिश से
वादे को जलाना
मेरी आवाज़ की
स्वर लहरी पर
हर रस्मो- रिवाज़ की
जंजीरों को तोड़कर
आने के वादे को
क्या भूल गयी हो
धड़कन के साथ
गुंजार होते मेरे नाम को
देख , मुझे तो
तेरी हर कसम
हर वादा
आज भी याद है
ज़िन्दगी की आखिरी
साँस तक सिर्फ
तुझे चाहने का
वादा किया था
और आज भी
उसे ही निभा रहा हूँ
इसी जन्म में
मिलन की बाट
जोह रहा हूँ
तेरे वादे की लाश
को ढोह रहा हूँ
अब तो आजा जानाँ
यारा
मुझे मेरे यार से
मिला जा जानाँ
मेरे प्यार को
मेरे इंतज़ार को
अमर बना जा जानाँ
बस एक बार
आजा जानाँ
बस एक बार…!!
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12 टिप्पणियां:
बहुत ही सुन्दर और लाजवाब कविता रही! बढ़िया लगा!
वंदना जी की सुन्दर रचना. सप्तरंगी प्रेम पर प्रकाशन के लिए बधाई !!
सुन्दर...प्रेम भाव से भरी सुन्दर रचना...
बहुत सुंदर रचना..प्रेम मे पगी रचना.!!
वन्दना गुप्ता जी की सुन्दर रचना पढ़वाने के लिए आभार!
प्रीत रस से सरोवर सुन्दर रचना ..शुभकामनाये वंदना जी !
बहुत प्यारी रचना ... बधाई
बढ़िया रचना ....बधाई वंदना जी
प्यार की पुकार तो कोई कैसे ना आए
इसी जन्म में
मिलन की बाट
जोह रहा हूँ
तेरे वादे की लाश
को ढोह रहा हूँ
....बेहतरीन भावों से सजी खूबसूरत कविता..बधाई.
मुझे मेरे यार से
मिला जा जानाँ
मेरे प्यार को
मेरे इंतज़ार को
अमर बना जा जानाँ
बस एक बार
आजा जानाँ
.....मन को छूती है ये पंक्तियाँ..वंदना जी को इस शानदार प्रस्तुति पर बधाइयाँ.
aap bahut achha likh rahi hai. dr. somnath yadav
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