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गुरुवार, 16 सितंबर 2010

कहना चाहती हूं ...

'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती किरण राजपुरोहित नितिला जी की कविता. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा...

बहुत कुछ कहना चाहती हूं
जताना चाहती हूं
हवाओं से
गुलाबों से
खुश्बुओं से
जो मन में है
कि तुम क्या हो !!!
मेरे जीवन में ,
पर
कुछ कहना चाहूं
तो
होंठ संकोच से
सिमट कर रह जाते है
चुप सी छा जाती है
अर्थों पर
और वह चुप्पी
बयां कर देती है
जो लफ़जों के बंधे किनारे
से बहुत अधिक
नीले आसमां तक
शून्य के चहुं ओर
फैल कर
पत्तों की
सर सर
भोर की खन खन
से भी अधिक
होती है !
तब सोचूं
तुम स्वर हो मेरे
और
मैं
तुम्हारा
मौन वर्णन !

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किरण राजपुरोहित नितिला / जोधपुर/ रूचि-साहित्य पढना,कविता कहानी लिखना, फोटोग्राफी , स्कैच बनाना, तैल चित्रकारी करना ,ऐतिहासिक जगह देखना/ मेरे बारे में : छोटी छोटी खुशियां जो अनमोल है ,बस वही तो सही जिंदगी है उन में से एक यह ब्ब्ब्लॉग. ब्ब्लॉग की दुनिया में मैं एक बूंद हूं । पूरे वजूद के साथ् खनकती हूं। कभी आर्टिस्ट कभी लिखना और घर की रानी हूं तो राज तो करती ही हूं. अंतर्जाल पर भोर की पहली किरण के माध्यम से सक्रियता.
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