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बुधवार, 7 अप्रैल 2010

प्रेम आधारित रचनाओं का स्वागत : सप्तरंगी प्रेम

सप्तरंगी प्रेम ब्लॉग पर हम प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटे रचनाओं को प्रस्तुत करेंगे. जो रचनाकार इसमें भागीदारी चाहते हैं, वे अपनी 2 मौलिक रचनाएँ, जीवन वृत्त, फोटोग्राफ भेज सकते हैं. रचनाएँ व जीवन वृत्त यूनिकोड फॉण्ट में ही हों.
रचनाएँ भेजने के लिए मेल- hindi.literature@yahoo.com

18 टिप्‍पणियां:

अक्षिता (पाखी) ने कहा…

Thnx for visiting my blog..Ur is also nice !!

raghav ने कहा…

इस सद्प्रयास के लिए बधाई.

raghav ने कहा…

इस सद्प्रयास के लिए बधाई.

Shahroz ने कहा…

U r most welcome.

शरद कुमार ने कहा…

आपके नए ब्लॉग का स्वागत है.

Amit Kumar ने कहा…

सुन्दर प्रयास..स्वागत है.

मनोज कुमार ने कहा…

अच्छी प्रस्तुति। बधाई। ब्लॉगजगत में स्वागत।

Akanksha~आकांक्षा ने कहा…

इस शुभ कार्य में हमारा सहयोग आपके साथ बना रहेगा..

dr. ashok priyaranjan ने कहा…

very nice
http://www.ashokvichar.blogspot.com
http://drashokpriyaranjan.blogspot.com

संगीता पुरी ने कहा…

इस नए चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

KK Yadava ने कहा…

बहुत खूब..ब्लॉग की उछाड़ -पछाड़ से परे प्रेम की सुकूनदायी दुनिया...बधाई.

Ram Shiv Murti Yadav ने कहा…

यह हुई न कोई सार्थक बात ..शुभकामनायें !!

Rashmi Singh ने कहा…

Beautifull !!

Ghanshyam ने कहा…

..तब तो यहाँ रोज आना पड़ेगा.

Ratnesh ने कहा…

Most Welcome.

डाकिया बाबू ने कहा…

उम्दा प्रस्तुति..बधाइयाँ.

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

बेहतरीन प्रयास..स्वागत है.

जयराम “विप्लव” { jayram"viplav" } ने कहा…

कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,

धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,

कलम के पुजारी अगर सो गये तो

ये धन के पुजारी वतन बेंच देगें।

हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . नीचे लिंक दिए गये हैं . http://www.janokti.com/ , साथ हीं जनोक्ति द्वारा संचालित एग्रीगेटर " ब्लॉग समाचार " http://janokti.feedcluster.com/ से भी अपने ब्लॉग को अवश्य जोड़ें .