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गुरुवार, 8 अप्रैल 2010

पहला प्यार : आकांक्षा यादव

'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर हम प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटी रचनाओं को प्रस्तुत कर रहे हैं, इसमें आपकी भागीदारी अपेक्षित है. इस क्रम में आज आकांक्षा यादव जी की कविता 'पहला प्यार' आपके समक्ष प्रस्तुत है, आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा...

पहली बार
इन आँखों ने महसूस किया
हसरत भरी निगाहों को

ऐसा लगा
जैसे किसी ने देखा हो
इस नाजुक दिल को
प्यार भरी आँखों से

न जाने कितनी
कोमल और अनकही भावनायें
उमड़ने लगीं दिल में

एक अनछुये अहसास के
आगोश में समाते हुए
महसूस किया प्यार को

कितना अनमोल था
वह अहसास
मेरा पहला प्यार !!


आकांक्षा यादव

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आकांक्षा यादव जी न सिर्फ सक्रिय ब्लॉगर हैं बल्कि बहुविध व्यक्तित्व को अपने में समेटे एवं साहित्यिक सरोकारों से अटूट लगाव रखने वाली एक प्रतिभाशाली युवा कवयित्री व लेखिका हैं. कालेज में प्रवक्ता के साथ-साथ साहित्य की ओर रूझान। पैदाइश गाजीपुर के सैदपुर मोहल्ले में, फिलहाल पतिदेव के साथ अंडमान-निकोबार में। रचनात्मक अध्ययन व लेखन विशेषकर नारी विमर्श, बाल विमर्श व सामाजिक समस्याओं सम्बन्धी विषयों में गहरी रूचि। पहली कविता दिसम्बर 2005 में कादम्बिनी में एवं तत्पश्चात पुनर्नवा, दैनिक जागरण में प्रकाशित। दैनिक जागरण में प्रकाशित कविता पर प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा पुरस्कृत। फिलहाल कविताओं के साथ-साथ लेख एवं लघुकथाओं का सृजन। साहित्य अमृत, कादम्बिनी, इण्डिया टुडे, युगतेवर, आजकल, उत्तर प्रदेश, इण्डिया न्यूज, दैनिक जागरण, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला, स्वतंत्र भारत, आज, गोलकोंडा दर्पण, युद्धरत आम आदमी, अरावली उद्घोष, मूक वक्ता, सबके दावेदार, प्रतिश्रुति, प्रगतिशील आकल्प, शोध दिशा, साहित्य क्रांति, राष्ट्रधर्म, सेवा चेतना, समकालीन अभिव्यक्ति, सरस्वती सुमन, नारी अस्मिता, शब्द, लोक गंगा, आकंठ, गृहलक्ष्मी, गृहशोभा, कथाचक्र, तुलसी प्रभा, नये पाठक सहित शताधिक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का नियमित प्रकाशन। एक दर्जन से अधिक काव्यसंकलनों में रचनाओं का प्रकाशन। ‘‘क्रान्ति-यज्ञ‘‘ पुस्तक में सम्पादन सहयोग।

अन्तर्जाल पर शब्द शिखर और उत्सव के रंग ब्लाग के माध्यम से सक्रिय। इसके अलावा सृजनगाथा, अनुभूति, साहित्यकुंज, साहित्यशिल्पी, रचनाकार, हिन्दी नेस्ट, कलायन, चोखेरबाली, नारी, सार्थक सृजन, ताका झाँकी इत्यादि पर भी रचनाओं का प्रकाशन। संस्कृत विषय की प्रवक्ता होने के साथ-साथ साहित्यिक सरोकारों से गहरे जुड़ाव, राष्ट्रभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार, रचनाधर्मिता, सतत् साहित्य सृजनशीलता एवं सम्पूर्ण कृतित्व हेतु तमाम प्रतिष्ठित सामाजिक-साहित्यिक संस्थाओं ने आपको सम्मानों से विभूषित किया है। इनमें इन्द्रधनुष साहित्यिक संस्था, बिजनौर द्वारा ‘‘साहित्य गौरव‘‘ व ‘‘काव्य मर्मज्ञ‘‘, राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा ‘‘भारती ज्योति‘‘, श्री मुकुन्द मुरारी स्मृति साहित्यमाला, कानपुर द्वारा ‘‘साहित्य श्री सम्मान‘‘, मध्य प्रदेश नवलेखन संघ द्वारा ‘‘साहित्य मनीषी सम्मान‘‘, छत्तीसगढ़ शिक्षक-साहित्यकार मंच द्वारा ‘‘साहित्य सेवा सम्मान‘‘, देवभूमि साहित्यकार मंच, पिथौरागढ़ द्वारा ‘‘देवभूमि साहित्य रत्न‘‘, ऋचा रचनाकार परिषद, कटनी द्वारा ‘‘भारत गौरव‘‘, आसरा समिति, मथुरा द्वारा ‘‘ब्रज-शिरोमणि‘‘, ग्वालियर साहित्य एवं कला परिषद, ग्वालियर द्वारा ‘‘शब्द माधुरी‘‘ सम्मान एवं भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा ‘‘वीरांगना सावित्रीबाई फुले फेलोशिप सम्मान‘ इत्यादि प्रमुख हैं।

स्वाभाव से सहज, सौम्य व विनम्र आकांक्षा जी ने एक साहित्यकार के रूप में बहुत ही खुले नजरिये से संवेदना के मानवीय धरातल पर जाकर अपनी रचनाओं का विस्तार किया है। बिना लाग लपेट के सुलभ भाव भंगिमा सहित जीवन के कठोर सत्य उभरें यही आपकी लेखनी की शक्ति है। आपकी रचनाओं में जहाँ जीवंतता है, वहीं उसे सामाजिक संस्कार भी दिया है। निश्चिततः, आकांक्षा जी ने अपने मनोभावों को जो शब्दाभिव्यक्ति दी है, वह अविलक्षण है और अन्तर्मन से विशु़द्ध साहित्यिक है। आकांक्षा यादव की प्रतिभा स्वत: प्रस्फुटित होकर सामने आ रही है। आकांक्षा जी के व्यक्तित्व-कृतित्व पर दहलीज, वुमेन ऑन टॉप, बाल साहित्य समीक्षा, गुफ्तगू, नेशनल एक्सप्रेस, दलित टुडे, सुदर्शन श्याम सन्देश, यादव ज्योति, यादव साम्राज्य, नवोदित स्वर, हिन्दी ज्योति बिम्ब जैसी तमाम पत्र-पत्रिकाओं ने आलेख प्रकाशित किये हैं. डा0 राष्ट्रबंधु द्वारा सम्पादित 'बाल साहित्य समीक्षा' पत्रिका ने आपके बाल साहित्य पर विशेषांक भी जारी किया है. दिल्ली से प्रकाशित नारी सरोकारों को समर्पित पत्रिका 'वुमेन ऑन टॉप' ने जून 2008 अंक में अपनी आवरण कथा ‘हम में है दम, सबसे पहले हम‘ में देश की तमाम प्रतिष्ठित नारियों में आपको स्थान दिया है, जिन्होंने अपनी बहुआयामी प्रतिभा की बदौलत समाज में नाम रोशन किया।

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