गीत प्रणय का अधर सजा दो ।
स्निग्ध मधुर प्यार छलका दो ।
शीतल अनिल अनल दहकाती,
सोम कौमुदी मन बहकाती,
रति यामिनी बीती जाती,
प्राण प्रणय आ सेज सजा दो ।
गीत प्रणय का अधर सजा दो ।
गीत प्रणय का अधर सजा दो ।
स्निग्ध मधुर प्यार छलका दो ।
ताल नलिन छटा बिखराती,
कुंतल लट बिखरी जाती,
गुंजन मधुप विषाद बढाती,
प्रिय वनिता आभास दिला दो ।
गीत प्रणय का अधर सजा दो ।
गीत प्रणय का अधर सजा दो ।
स्निग्ध मधुर प्यार छलका दो ।
नंदन कानन कुसुम मधुर गंध,
तारक संग शशि नभ मलंद,
अनुराग मृदुल शिथिल अंग,
रोम रोम मद पान करा दो ।
गीत प्रणय का अधर सजा दो ।
गीत प्रणय का अधर सजा दो ।
स्निग्ध मधुर प्यार छलका दो ।
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नाम- कुलवंत सिंह
स्थान- मुंबई
रुचियां - कवि सम्मेलनो में भाग लेना। मंच संचालन। क्विज मास्टर। विज्ञान प्रश्न मंच प्रतियोगिता आयोजन। मानव सेवा धर्म - डायबिटीज, जोड़ों का दर्द, आर्थराइटिस, कोलेस्ट्रोल का प्राकृतिक रूप से स्थाई इलाज। अंतर्जाल पर गीत सुनहरे के माध्यम से सक्रियता.
14 टिप्पणियां:
कुलवंत जी को पहले भी कई बार पढ़ चुका हूँ..आज थोड़ा अलग अंदाज पर ये रंग भी बढ़िया...प्रेम की गीत में भी माहिर है...सुंदर प्रस्तुति के लिए धन्यवाद...
सुंदर रचना .....
शुभकामनाएं...............
http://rajdarbaar.blogspot.com
kulwant ji ki Bhagat singh par likhi rachnayein jyada padhi hai...shringaar me bhi unki kalam khoob chalti hai..
http://dilkikalam-dileep.blogspot.com/
nice
bahut sundar rachna
bandhai aap ko is ke liye
shekhar kumawat
http://kavyawani.blogspot.com
बहुत सुन्दर प्रणय गीत..कुलवंत जी को बधाई.
सुघड़ कविता ...!!
बहुत खूबसूरत प्रणय गीत
बहुत सुन्दर रचना..
खूबसूरत कविता ..
बहुत सुन्दर गीत !!
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'पाखी की दुनिया' में इस बार माउन्ट हैरियट की सैर करना न भूलें !!
बेहतरीन अभिव्यक्तियाँ..सुन्दर भाव..सहज शब्द..बधाई.
मनोरम कविता है ।अभिलाषाजी बधाई।
aap sabhi mitro kaa haardik dhanyavaad
अच्छी रचना .... खूब लिखा है !!! शुभकामनाएँ..
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