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शनिवार, 17 अप्रैल 2010

प्रणय गीत

'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटता कवि कुलवंत सिंह का प्रणय-गीत. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा...

गीत प्रणय का अधर सजा दो ।
स्निग्ध मधुर प्यार छलका दो ।

शीतल अनिल अनल दहकाती,
सोम कौमुदी मन बहकाती,
रति यामिनी बीती जाती,
प्राण प्रणय आ सेज सजा दो ।
गीत प्रणय का अधर सजा दो ।

गीत प्रणय का अधर सजा दो ।
स्निग्ध मधुर प्यार छलका दो ।

ताल नलिन छटा बिखराती,
कुंतल लट बिखरी जाती,
गुंजन मधुप विषाद बढाती,
प्रिय वनिता आभास दिला दो ।
गीत प्रणय का अधर सजा दो ।

गीत प्रणय का अधर सजा दो ।
स्निग्ध मधुर प्यार छलका दो ।

नंदन कानन कुसुम मधुर गंध,
तारक संग शशि नभ मलंद,
अनुराग मृदुल शिथिल अंग,
रोम रोम मद पान करा दो ।
गीत प्रणय का अधर सजा दो ।

गीत प्रणय का अधर सजा दो ।
स्निग्ध मधुर प्यार छलका दो ।

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नाम- कुलवंत सिंह
स्थान- मुंबई
रुचियां - कवि सम्मेलनो में भाग लेना। मंच संचालन। क्विज मास्टर। विज्ञान प्रश्न मंच प्रतियोगिता आयोजन। मानव सेवा धर्म - डायबिटीज, जोड़ों का दर्द, आर्थराइटिस, कोलेस्ट्रोल का प्राकृतिक रूप से स्थाई इलाज। अंतर्जाल पर गीत सुनहरे के माध्यम से सक्रियता.
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