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रविवार, 6 फ़रवरी 2011

ये प्यार है : शिखा वार्ष्णेय

कुछ कोमल से अहसास हैं
कुछ सोये हुए ज़ज्वात हैं
है नहीं ये ज्वाला कोई
सुलगी सुलगी सी आग है
कुछ और नहीं ये प्यार है।
धड़कन बन जो धड़क रही
ज्योति बन जो चमक रही
साँसों में बसी सुगंध सी
महकी महकी सी बयार है
कुछ और नहीं ये प्यार है।
हो कोई रागिनी छिडी जेसे
रिमझिम पड़ती बूंदे वेसे
है झंकृत मन का तार तार
लिए प्रीत का पावन संसार है
कुछ और नहीं ये प्यार है !!
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शिखा वार्ष्णेय, moscow state university से गोल्ड मैडल के साथ
T V Journalism में मास्टर्स करने के बाद कुछ समय एक टीवी चेनेंल में न्यूज़ प्रोड्यूसर के तौर पर काम किया ,हिंदी भाषा के साथ ही अंग्रेजी ,और रुसी भाषा पर भी समान अधिकार है परन्तु खास लगाव अपनी मातृभाषा से ही है.वर्तमान में लन्दन में रहकर स्वतंत्र लेखन जारी है.अंतर्जाल पर स्पंदन (SPANDAN)के माध्यम से सक्रियता.
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