फ़ॉलोअर

गुरुवार, 20 मई 2010

प्यार का सार

'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती रश्मि प्रभा जी की एक कविता. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा...

दस्तकें यादों की
सोने नहीं देतीं
दरवाज़े का पल्ला
शोर करता है
खट खट खट खट...
सांकल ही नहीं
तो हवाएँ नम सी
यादों की सिहरन बन
अन्दर आ जाती हैं
पत्तों की खड़- खड़
मायूस कर जाती हैं !
कुछ पन्ने मुड़े-तुड़े लेकर
अरमानों की आँखें खुली हैं
एक ख़त लिख दूँ.....
संभव है दस्तकों की रूह को
चैन आ जाए
हवाएँ एक लोरी थमा जाए
भीगे पन्ने
प्यार का सार बन जायें !
****************************************************************************

नाम- रश्मि प्रभा
स्नातक - हिंदी प्रतिष्ठा
रूचि- शब्दों के साथ जीना
प्रकाशन- 'कादम्बिनी', 'अर्गला', वोमेन ऑन टॉप', 'पुरवाई '(यूके से प्रकाशित पत्रिका), 'जनसत्ता' आदि में रचनाएँ प्रकाशित, हिन्दयुग्म में ऑनलाइन कवि-सम्मलेन सञ्चालन.
प्रकाशित कृतियाँ- शब्दों का रिश्ता (काव्य-संग्रह), अनमोल संचयन (काव्य-संग्रह का संपादन)
मेरे बारे में- सौभाग्य मेरा की मैं कवि पन्त की मानस पुत्री श्रीमती सरस्वती प्रसाद की बेटी हूँ और मेरा नामकरण स्वर्गीय सुमित्रा नंदन पन्त ने किया और मेरे नाम के साथ अपनी स्व रचित पंक्तियाँ मेरे नाम की..."सुन्दर जीवन का क्रम रे, सुन्दर-सुन्दर जग-जीवन" , शब्दों की पांडुलिपि मुझे विरासत मे मिली है. अगर शब्दों की धनी मैं ना होती तो मेरा मन, मेरे विचार मेरे अन्दर दम तोड़ देते...मेरा मन जहाँ तक जाता है, मेरे शब्द उसके अभिव्यक्ति बन जाते हैं, यकीनन, ये शब्द ही मेरा सुकून हैं. अंतर्जाल पर मेरी भावनाएं के माध्यम से सक्रियता.

21 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

कुछ पन्ने मुड़े-तुड़े लेकर
अरमानों की आँखें खुली हैं
एक ख़त लिख दूँ.....
संभव है दस्तकों की रूह को
चैन आ जाए

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति......प्यार हमेशा ही भीगा भीगा सा होता है.....

Unknown ने कहा…

दस्तकें यादों की
सोने नहीं देतीं
दरवाज़े का पल्ला
शोर करता है
its beautiful ...y sach hi hi hai k yaado ki dastak kabhi sone nhi deti
kabhi hasati hai,kabhi rulati hai yadoo ki dastak kabhi akela hi nhi hone deti ............. neelima

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

दस्तकें यादों की
सोने नहीं देतीं
दरवाज़े का पल्ला
शोर करता है
खट खट खट खट...
सांकल ही नहीं
तो हवाएँ नम सी
यादों की सिहरन बन
अन्दर आ जाती हैं"...
rashmi ji ke any kavitaon ki tarah hi prem me doob kar likhi gai... bhavon se ot-prot kavita...

संतोष कुमार "प्यासा" ने कहा…

vah,
bahut khoob,

Avinash Chandra ने कहा…

कुछ पन्ने मुड़े-तुड़े लेकर
अरमानों की आँखें खुली हैं
एक ख़त लिख दूँ.....

:)
Khubsurat...behad khubsurat, baaki to shabd aapke khat par hi utrenge :)

shikha varshney ने कहा…

दस्तकें यादों की
सोने नहीं देतीं
दरवाज़े का पल्ला
शोर करता है
Behtareen panktiyan hain...bahut sundar kavita.

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

कुछ पन्ने मुड़े-तुड़े लेकर
अरमानों की आँखें खुली हैं
एक ख़त लिख दूँ.....
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति शब्दों से ही खेलना रचना हैं जो कुछ सोचने को मजबूर कर देती है.

मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा…

rashmi di! sayad aapka ek khat khafi hai, saptrangi prem ko barsane ke liye...:)

Unknown ने कहा…

बहुत सुन्दर कविता लिखी रश्मि प्रभा जी ने..हार्दिक बधाई !!

वाणी गीत ने कहा…

कुछ पन्ने मुड़े-तुड़े लेकर
अरमानों की आँखें खुली हैं
एक ख़त लिख दूँ.....
संभव है दस्तकों की रूह को
चैन आ जाए...

दस्तकें यादों की फिर भी सोने तो नहीं देती ...अपनी नींद उड़ा कर भी दस्तकों की रूह को आराम पहुँचाने की कवायद आप ही कर सकती हैं .....!!

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

Rashmiji bgdhai

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना!
रश्मिप्रभा जी तो बहुत ही बढ़िया रचनाधर्मी हैं!

KK Yadav ने कहा…

कुछ पन्ने मुड़े-तुड़े लेकर
अरमानों की आँखें खुली हैं
एक ख़त लिख दूँ....

.......अब लिख ही डालिए...उम्दा प्रस्तुति.

राजीव थेपड़ा ( भूतनाथ ) ने कहा…

vaah....acchhi lagi yah abhivyakti....man ko thndaa kar gayi...!!sach....

Akanksha Yadav ने कहा…

हवाएँ एक लोरी थमा जाए
भीगे पन्ने
प्यार का सार बन जायें !

...प्यार का यह सार अच्छा लगा...रश्मिप्रभा जी को बधाई !!

Urmi ने कहा…

बहुत सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ आपने शानदार कविता लिखा है! बधाई!

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

rashmi ji,
aapki rachna mein yun bhi samvednaaon ki rooh basti hai...

''संभव है दस्तकों की रूह को
चैन आ जाए''
bahut sundar rachna, badhai sweekaren.

बेनामी ने कहा…

Behad khubsurat bhavabhivyakti.Rashmi Prabha ji ko badhai.

Razi Shahab ने कहा…

sundar

स्वाति ने कहा…

कुछ पन्ने मुड़े-तुड़े लेकर
अरमानों की आँखें खुली हैं
एक ख़त लिख दूँ.....
संभव है दस्तकों की रूह को
चैन आ जाए
सुन्दर अभिव्यक्ति......
रश्मिप्रभा जी को बधाई

मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा…

bhinge panne........sayad pyar ka saar ban jaye......:)

di aapke tarah aapki kavita.....ekdum...dil ko chhune wali...:)