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बुधवार, 18 अगस्त 2010

सपना सपना ही रहने दो

'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती नीलम पुरी जी की एक ग़ज़ल. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा...

सपना सपना ही रहने दो,
सपने मैं ही सही तुम्हे अपना कहने दो,

तुम्हें मुबारक हो घर अपना
दीवारों से मुझको लिपटा रहने दो,

महफ़िल में गाना तुम गीत अपने ,
ग़ज़ल मेरी है मुझे ग़ज़ल कहने दो,

लहरों ने छुआ साहिल को कई बार,
मुझे तुम्हारा अहसास ही रहने दो,

खामोश हैं लब मेरे तो कोई बात नहीं ,
कहते है कहानी आँखों के अश्क उन्हें कहने दो,

मील के पत्थर बताते हैं मंजिल का पता.
पत्थर ही सही उसे मेरा हम सफ़र रहने दो,

सब कह लेते है जज़्बात अपनी जुबान से,
कलम मेरी भी कुछ कहती है उसे कहने दो.

इंतज़ार की हद्द बाकी है अभी,
आँखों को मरने के बाद भी खुला रहने दो,

सपना सपना ही रहने दो,
सपने मैं ही सही तुम्हे अपना कहने दो.
**********************************************************************************

(नीलम पुरी जी के जीवन-परिचय के लिए क्लिक करें)

21 टिप्‍पणियां:

मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा…

sapne me hi sahi, apna to kahne do.......:)

kitni pyari baat kahi aapne!!

god bless.....!!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

इंतज़ार की हद्द बाकी है अभी,
आँखों को मरने के बाद भी खुला रहने दो,


बहुत सुन्दर गज़ल...

Akanksha Yadav ने कहा…

सपना सपना ही रहने दो,
सपने मैं ही सही तुम्हे अपना कहने दो.

...खूबसूरत अभिव्यक्ति..शानदार ग़ज़ल..बधाई नीलम पुरी जी को.

Neelam ने कहा…

Mukesh jee..bahut bahut shukriya.

Neelam ने कहा…

Sangeeta jee dhanyavaad..:)

Neelam ने कहा…

Sangeeta jee dhanyavaad..:)

Neelam ने कहा…

Akansha jee ..bahut shukriya .

Neelam ने कहा…

Akansha jee ..bahut shukriya .

Unknown ने कहा…

सपना सपना ही रहने दो,
सपने मैं ही सही तुम्हे अपना कहने दो.

............क्या नज्म लिखी है आपने नीलम जी
मन को भा गई ......

sanu shukla ने कहा…

बहुत सुन्दर गज़ल...

Akshitaa (Pakhi) ने कहा…

कित्ती प्यारी रचना...बधाई.
__________________
पाखी की दुनिया में मायाबंदर की सैर करें...

कामरूप 'काम' ने कहा…

नमस्कार,

हिन्दी ब्लॉगिंग के पास आज सब कुछ है, केवल एक कमी है, Erotica (काम साहित्य) का कोई ब्लॉग नहीं है, अपनी सीमित योग्यता से इस कमी को दूर करने का क्षुद्र प्रयास किया है मैंने, अपने ब्लॉग बस काम ही काम... Erotica in Hindi. के माध्यम से।

समय मिले और मूड करे तो अवश्य देखियेगा:-

टिल्लू की मम्मी

टिल्लू की मम्मी -२

सु-मन (Suman Kapoor) ने कहा…

बहुत सुन्दर कविता ................ बेहतरीन................

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

आप की रचना 20 अगस्त, शुक्रवार के चर्चा मंच के लिए ली जा रही है, कृप्या नीचे दिए लिंक पर आ कर अपने सुझाव देकर हमें प्रोत्साहित करें.
http://charchamanch.blogspot.com

आभार

अनामिका

Sadhana Vaid ने कहा…

खामोश हैं लब मेरे तो कोई बात नहीं ,
कहते है कहानी आँखों के अश्क उन्हें कहने दो,

आपने इतनी खूबसूरती से अपनी भावनाओं को व्यक्त किया है कि प्रशंसा के लिये शब्द नहीं हैं मेरे पास ! इतनी प्यारी रचना के लिये बधाई एवं आभार !

Khare A ने कहा…

gazal bahut hi achhi hui he

badhai swikare

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

bahut bahut badhai neelam puriji

रंजना ने कहा…

कोमल भाव,सहज सुन्दर अभिव्यक्ति...
बहुत सुन्दर ग़ज़ल..

रंजू भाटिया ने कहा…

सब कह लेते है जज़्बात अपनी जुबान से,
कलम मेरी भी कुछ कहती है उसे कहने दो.

बहुत सुन्दर बहुत खूब लिखती हैं आप ...बेहद पसंद आया आपका लिखा हुआ

अपनी माटी,चित्तौड़गढ़ ने कहा…

bahut achhe

संजय भास्‍कर ने कहा…

सपना सपना ही रहने दो,
.....क्या नज्म लिखी है आपने नीलम जी
आज पहली बार आना हुआ पर आना सफल हुआ बेहद प्रभावशाली प्रस्तुति