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शनिवार, 7 अगस्त 2010

रुकते थमते से ये कदम

'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती शिखा वार्ष्णेय जी की कविता 'रुकते थमते से ये कदम'. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा...

रुकते थमते से ये कदम
अनकही कहानी कहते हैं
यूँ ही मन में जो उमड़ रहीं
ख्यालों की रवानी कहते हैं
रुकते थमते.....
सीने में थी जो चाह दबी
होटों पे थी जो प्यास छुपी
स्नेह तरसती पलकों की
दिलकश कहानी कहते हैं
रुकते थमते....
धड़कन स्वतः जो तेज हुई
अधखिले लव जो मुस्काये
माथे पर इठलाती लट की
नटखट नादानी कहते हैं।
रुकते थमते....
सघन अंधेरी रातों में
ज्यों हाथ लिए हो हाथों में
दो जुगनू सी जो चमक
रही आँखों की सलामी कहते हैं
रुकते थमते...
लावण्या अपार ललाटो पर
सिंदूरी रंग यूँ गालों
पर मद्धम -मद्धम सी साँसों की
मदमस्त खुमारी कहते हैं
रुकते थमते....!!
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(शिखा वार्ष्णेय जी के जीवन-परिचय के लिए क्लिक करें)

25 टिप्‍पणियां:

Arvind Mishra ने कहा…

पल छिन अहसासों और उधेड़ बुन को जताती एक सुन्दर सी कविता

Bhanwar Singh ने कहा…

बहुत सुन्दर...शिखा जी को बधाई.

Bhanwar Singh ने कहा…

प्रेम आधारित इस ब्लॉग पर नित अनुपम प्रस्तुति..आकांक्षा जी को साधुवाद.

वाणी गीत ने कहा…

गीत याद आ रहा है...
आपकी मदभरी आँखों को कँवल कहते हैं ...
मौसम के जैसी ही सरस कविता ...
सुन्दर ...!

KK Yadav ने कहा…

शिखा वार्ष्णेय जी का एक और खूबसूरत गीत....वाकई मन प्रफुल्लित हो गया.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

रुकते-थमते से कदम, कहते व्यथा विशेष।
मस्त खुमारी में कटे, पलभर में अनिमेष।।
--
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति!

मनोज कुमार ने कहा…

इस कविता में प्रत्यक्ष अनुभव की बात की गई है, इसलिए सारे शब्द अर्थवान हो उठे हैं।

मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा…

sundar, bahut sundar..........:)

sanu shukla ने कहा…

बहुत सुन्दर कविता...!!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

लावण्या अपार ललाटो पर
सिंदूरी रंग यूँ गालों
पर मद्धम -मद्धम सी साँसों की
मदमस्त खुमारी कहते हैं
रुकते थमते....!!

यह रुकते थमते से कदम ......बहुत सुन्दर रचना ... :):)

shikha varshney ने कहा…

आप सभी का तहे दिल से शुक्रिया.

rashmi ravija ने कहा…

बहुत ही सुन्दर ...कविता

ashish ने कहा…

सुन्दर कविता. पढ़ कर अच्छा लगा, लेकिन रुकते थमते नहीं, एक साँस में.

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

bahut sundar kavita badhai shikhaji

परमजीत सिहँ बाली ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना!!

vandan gupta ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति…

अजय कुमार ने कहा…

आनंदित करनेवाली रचना ।

शारदा अरोरा ने कहा…

बहुत ही सुन्दर झन्कार लिए ये गीत अपनी ही रवानी कहता है ।

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

माथे पर इठलाती लट की
नटखट नादानी कहते हैं।
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यह पढ़कर मन मुदित हुआ!
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रश्मि प्रभा... ने कहा…

लावण्या अपार ललाटो पर
सिंदूरी रंग यूँ गालों
पर मद्धम -मद्धम सी साँसों की
मदमस्त खुमारी कहते हैं
रुकते थमते....!!
apratim

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

वाह... शिखा जी, ऐसी सुन्दर रचना के लिए बधाई.

S R Bharti ने कहा…

बेहतरीन कविता..बधाई.

Sadhana Vaid ने कहा…

बेहद खूबसूरत अहसासों से सजी बेहतरीन रचना ! आपको बहुत बहुत बधाई !

बेनामी ने कहा…

umda kaveeta.....

Meri Nayi Kavita Padne Ke Liye Blog Par Swaagat hai aapka......

A Silent Silence : Ye Paisa..

Banned Area News : Jogging in park better than gym

समयचक्र ने कहा…

जश्ने आजादी मुबारक हो... जय हिंद