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सोमवार, 6 दिसंबर 2010

मैं और मेरी तन्हाई

'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती अनामिका घटक की कविता। आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा...

इस सूने कमरे में है बस
मैं और मेरी तन्हाई
दीवारों का रंग पड गया फीका
थक गयी ऑंखें पर वो न आयी
छवि जो उसकी दिल में समाया
दीवारों पर टांग दिया
तू नहीं पर तेरी छवि से ही
टूटे मन को बहला लिया
पर क्या करूँ इस अकेलेपन का
बूँद-बूँद मन को रिसता है
उस मन को भी न तज पाऊँ मैं
जिस मन में वो छब बसता है
शायद वो आ जाए एक दिन
एकाकी घर संवर जाए
इस निस्संग एकाकीपन को
साथ कभी तेरा मिल जाए
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नाम:अनामिका घटक
जन्मतिथि : २७-१२-१९७०
जन्मस्थान :वाराणसी
कर्मस्थान: नॉएडा
व्यवसाय : अर्द्धसरकारी संस्थान में कार्यरत
शौक: साहित्य चर्चा , लेखन और शास्त्रीय संगीत में गहन रूचि.

7 टिप्‍पणियां:

रश्मि प्रभा... ने कहा…

bahut hi badhiyaa

वाणी गीत ने कहा…

वो आये तो घर संवर जाए ...
सुन्दर !

vandan gupta ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति।

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

तन्हाई पर सुंदर प्रस्तुति.

निर्मला कपिला ने कहा…

एकाकीपन को भाव सुन्दर शब्दों मे। धन्यवाद इसे पडःावाने के लिये।

Dr. Brajesh Swaroop ने कहा…

तन्हाई तो मुझे अच्छी लगती है, सो यह रचना भी..बधाई.

hot girl ने कहा…

beautiful poem,
nice post.