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बुधवार, 22 दिसंबर 2010

तेरे बगैर : सुमन 'मीत'

मेरे मेहरबां

मुड़ के देख ज़रा

कैसी बेज़ारी से गुजरता है

मेरा हर लम्हा

तेरे बगैर.....



तुम थे – 2

तो रोशन था

मेरे ज़र्रे-ज़र्रे में

सकूं का दिया

अब तू नहीं तो – 2

जलता है मेरा

हर कतरा

गम के दिये में

तेरे बगैर......



तुम थे – 2

तो महकती थी

तेरी खुशबू से

मेरी फुलवारी

अब तू नहीं तो – 2

सिमट गई है मेरी

हर डाली

यादों की परछाई में

तेरे बगैर.......



तुम थे तो मैं था – 2

मेरे होने का था

कुछ सबब

सींच कर अपने प्यार से

बनाया था ये महल

अब तू नहीं तो – 2

टूट कर बिखर गया हूँ

इक मकां सा बन गया हूँ

तेरे बगैर

तेरे बगैर.....
____________________________________________________________________________________
सुमन 'मीत'

12 टिप्‍पणियां:

Anamikaghatak ने कहा…

bhavpoorna rachana

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

खूबसूरत भावों से सजी सुन्दर रचना ..

vandan gupta ने कहा…

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (23/12/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
http://charchamanch.uchcharan.com

ashish ने कहा…

तेरे बगैर , कितना कुछ बदला बदला लगता है ना . भाव प्रवण कविता .

निवेदिता श्रीवास्तव ने कहा…

समर्पण भाव से भरी खूबसूरत रचना...

सु-मन (Suman Kapoor) ने कहा…

आकांक्षा जी ...मेरी रचना प्रकाशित करने के लिये शुक्रिया ।

रंजना ने कहा…

विरह का मार्मिक चित्र शब्दों में खींच दिया आपने...

अत्यंत प्रभावशाली रचना...

बहुत बहुत सुन्दर....वाह !!!

अनुपमा पाठक ने कहा…

भावपूर्ण अभिव्यक्ति!

ZEAL ने कहा…

भावुक कर देने वाली प्रभावशाली प्रस्तुति ।

उपेन्द्र नाथ ने कहा…

सुमन जी ने इस कविता मे जज्बातों को उड़ेलकर सुंदर मार्मिक चित्र खीचा है विरह प्रेम का .....बहुत ही सुंदर प्रस्तुति...

Akshitaa (Pakhi) ने कहा…

बहुत सुन्दर कविता..बधाई.

Manav Mehta 'मन' ने कहा…

bahut sahi kha suman tumne.......... kisi ke bagair ye zindagi aise hi ho jati hai......... :((